भारत

पढ़ाईकेदौरानशुरूकरदियाथाआंदोलन

राजीवनेश्रीप्रयागराज(तत्कालीनइलाहाबाद)केजेकेइंस्टीटयूटसेबी.टेक.कीशिक्षालेतेसमयही‘आजादीबचाओआंदोलन’सेजुडगए,जिसकेसंस्थापकबनवारीलालशर्माथे,जोइलाहाबादविश्वविद्यालयमेंहीगणितविभागकेमुख्यशिक्षकथे।संस्थामेंराजीवभाईप्रवक्ताकेपदपरथे।संस्थामेंअभयप्रताप,संतसमीर,केशर,रामधीरज,मनोजत्यागीवयोगेशकुमारमिश्राजीशोधकर्ताअपनेअपनेविषयोंपरशोधकार्यकरतेथे।जोसंस्थाद्वाराप्रकाशित‘नईआजादीउद्घोष’नामकमासिकपत्रिकामेंप्रकाशितहुआकरतेथे।

बाल्यकालसेहीथेजिज्ञासु

राजीवभाईकोबाल्यकालसेहीदेशकीसमस्तसमस्याओंकोजाननेकीगहरीरुचिथी।वेजबनौवीकक्षामेंथेकिअपनेइतिहासकेअध्यापकसेएकऐसासवालपूछा,जिसकाउत्तरउनअध्यापककेपासभीनहींथा।जैसाकिआपजानतेहैंकि,हमकोइतिहासकीकिताबोंमेपढायाजाताहैकि,अंग्रेजोंकाभारतकेराजासेप्रथमयुद्धसन1757मेपलासीकेमैदानमेंरॉबर्टक्लाइवऔरबंगालकेनवाबसिराजुद्दोलासेहुआथा।उसयुद्धमेंरॉबर्टक्लाइवनेसिराजुद्दोलाकोहरायाथाऔरउसकेबादभारतगुलामहोगयाथा।राजीवनेअपनेइतिहासकेअध्यापकसेपूछाकि,सर!मुझेयेबताइएकि,पलासीकेयुद्धमेंअंग्रेजोंकीओरसेलड़नेवालेकितनेसिपाहीथे?अध्यापकबोले-मुझकोनहींमालूम,तोराजीवनेपूछाक्योंनहींमालूम?अध्यापकबोलेकिमुझेकिसीनेनहींपढायाआजतकतोमैंतुमकोकहांसेपढ़ाऊं?राजीवनेपूछाकि,सरआपजरायेबताइएकिबिनासिपाहीकेकोईयुद्धहोसकताहै?अध्यापकनेकहानही....!फिरराजीवनेपूछाफिरहमकोयेक्योंनहींपढायाजाताहैकियुद्धमेंकितनेसिपाहीथेअंग्रेजोकेपास?एकऔरप्रश्नराजीवनेपूछाथाकि,तोयेबताइएकिअंग्रेजोंकेपासकितनेसिपाहीथे,येतोहमकोनहींमालुम।तोसिराजुद्दोला,जोहिंदुस्तानकीओरसेलड़रहाथा,उनकेपासकितनेसिपाहीथे? अध्यापकनेकहाकि,वोभीनहींमालूम।इसप्रश्नकाजवाबबहुतबडाऔरगंभीरहैकि,आखिरइतनाबड़ाभारतदेशमुठ्ठीभरअंग्रेजोंकादासकैसेहोगया?इसकाउत्तरआपकोराजीवभाईके'आजादीकाअसलीइतिहास'नामकव्याख्यानमेंमिलजाएगा।

प्रो.धर्मपालबनेगुरु

इसीबीचउनकीमुलाकातप्रो.धर्मपालनामकइतिहासकारसेहुई,जिनकीकिताबेंअमेरिकामेपढाईजातीहै,परंतुभारतमेनहीं।धर्मपालजीकोराजीवभाईअपनागुरुभीमानतेहै,उन्होनेराजीवभाईकेअनेकप्रश्नोंकेउत्तरढूंढनेमेबहुतमददकी।उन्होंनेराजीवभाईकोभारतकेबारेमेवोदस्तावेजउपलब्धकराए,जोइंग्लैंडकीलाइब्रेरीहाउसऑफकामन्समेरखेथे,जिनमेंअंग्रेजोनेपूरावर्णनकियाथाकिकैसेउन्होनेभारतगुलामबनाया।राजीवभाईनेउनसबदस्तावेजोंकाबहुतअध्यनकियाऔरयेजानकरउनकेरोंगटेखडेहोगएकिभारतकेलोगोकोभारतकेबारेमेकितनागलतइतिहासपढ़ायाजारहाहै।फिरलोगोंकेसामनेवास्तविकतालानेकेलिएराजीवभाईगांव,शहर–शहरजाकरव्याख्यानदेनेलगेऔरसाथ-साथदेशकीआजादीऔरदेशकेअन्यगंभीरसमस्याओकाइतिहासऔरउसकासमाधानतलाशनेमेंलगेरहते।

योगेशमिश्राकेपितानेबतायाआजादीकासच

इलाहबादमेंपढतेहुएउनकेएकनिकटस्थमित्रहुआकरतेथे,जिनकानामहैयोगेशमिश्रा।उनकेपिताइलाहबादहाईकोर्टमेवकीलथे।राजीवभाईऔरउनकेमित्रअक्सरउनसेदेशकीस्वतंत्रतासेजुडीरहस्यमयीबातोंपरवार्तालापकियाकरतेथे।तबराजीवभाईकोपताचलाकि15अगस्त1947कोदेशमेकोईआजादीनहींमिली,बल्कि14अगस्त1947कीरातकोअंग्रेजमाउंटबेटनऔरनेहरूकेबीचसमझोताहुआथा,जिसेसत्ताहस्तांतरणसंधिअर्थात"TransferofPowerAgreement"कहतेहैं।इससमझौतेकेअनुसारअंग्रेजअपनीकुर्सीपंडितजवाहरलालनेहरूकोदेकरजाएंगे,परंतुउनकेद्वाराभारतकोबर्बादकरनेकेलिएबनाएगए34,735कानूनवैसेहीइसदेशमेचलेंगे।स्वतंत्रतासंग्राममेंपूरेदेशकाविरोधईस्टइंडियाकंपनीकेविरुद्धथा,तोकेवलएकईस्टइंडियाकंपनीभारतछोड़करजाएगी,परंतुभारतकोलूटनेआईअन्य126विदेशीकंपनियांवैसेहीभारतमेंव्यापारकरकेअनवरतलूटतीरहेंगी।आजउनविदेशीकंपनियोंकीसंख्याबढ़कर6000पारकरगईहै।इसबारेमेऔरअधिकजानकरीउनकेव्याख्यानोंमेमिलेगी।

स्वदेशीआंदोलनकालियासंकल्प

सबजाननेकेबादराजीवभाईनेइनविदेशीकंपनियोंऔरभारतमेंचलरहेअंग्रेजीकानूनोंकेविरुद्धएकबारफिरसेवैसाहीस्वदेशीआंदोलनशुरूकरनेकासंकल्पलिया,जैसाकिसीसमयबालगंगाधरतिलकनेअंग्रेजोंकेविरुद्धकियाथा।

अपनेराष्ट्रमेपूर्णस्वतंत्रतालानेऔरआर्थिकमहाशक्तिकेरुपमेंखडाकरनेकेलिएउन्होंनेआजीवनब्रह्मचारीरहनेकीप्रतिज्ञाकीऔरउसेआजीवननिभाया।वेघूम-घूमकरलोगोंकोभारतमेंचलरहेअंग्रेजीकानून,आधीअधूरीआजादीकासच,विदेशीकंपनियोकीभारतमेंलूटआदिविषयोकेबारेमेबतानेलगे।सन1999मेंराजीवकेस्वदेशीव्याख्यानोंकीकैसेटोंनेसमूचेदेशमेंधूममचादीथी।

सन1984मेजबभारतमेंभोपालगैसकांडहुआ,तबराजीवनेइसकेपीछेकेषडयंत्रकापतालगाकरयेखुलासाकियाकियेकोईघटनानहींथी,बल्किअमेरिकाद्वाराकियागयाएकपरीक्षणथा(जिसकीअधिकजानकारीआपकोउनकेव्याख्यानोंमेंमिलेगी)तबराजीवभाईनेयूनियनकार्बाइडकंपनीकेविरुद्धप्रदर्शनकिया।इसीप्रकारसन1995-96मेंटिहरीबांधनिर्माणकेखिलाफऐतिहासिकमोर्चेमेंभागलियाऔरपुलिसलाठीचार्जमेंकाफीचोटेंभीखायी।इसीप्रकार1999मेंउन्होंनेराजस्थानकेकुछगांववासियोंसाथमिलकरएकशराबबनानेवालीकंपनी,जिसकोसरकारनेलाइसेंसदियाथाऔरवोकंपनीरोजजमीनकीनीचेबहुतअधिकमात्रामेपानीनिकालकरशराबबनानेवालीथी,उसकंपनीकोभगाया।

By Fraser