विद्यालय

बगहा।साठकेदशकमेंजनतावनेताकासीधासंवादहोताथा।तबऔरअबकेचुनावमेंकाफीफर्कआगयाहै।राजनेताजनताकेसुख-दुखकेसाथखड़ाहोतेथे।लेकिन,आजकेवलचुनावकेसमयहीनेताओंकेदर्शनहोतेहैं।यहकहनाहैकिमहुअवाकटहरवापंचायतअंतर्गतअमहटगांवनिवासी88वर्षीयबुजुर्गमहादेवयादवका।श्रीयादवकहतेहैंकि1962मेंपहलीबारगांवसेकरीबदोकिलोमीटरकीदूरीपरबसेमटियरियागांवकेप्राथमिकविद्यालयमेंमतदानकियाथा।पहलेमतदानमेंकाफीपरेशानीहोतीथी।दूरहोनेकीवजहसेघरकीनईनवेलीबहुएंवोटदेनेबहुतकमहीजातीथी।लेकिन,आजसमयबदलाहैगांवमेंहीवोटिगहोतीहै।इसलिएसभीअपनेमताधिकारकाप्रयोगकरतेहैं।कहतेहैंकिपहलेनेताजनताकेविकासकेलिएसोचतेथे।लेकिन,आजऐसानहींहै।चुनावकेवर्तमानपरिदृश्यकोदेखचर्चाकरनेपरतल्खहोजातेहैं।कहतेहैंकिपहलेचुनावकोलेकरइतनीआपाधापीनहींहोतीथी।उत्साहसेलबरेजप्रत्याशीपैदलहीक्षेत्रभ्रमणकियाकरतेथे।मतदानकीतिथिसेकईदिनपूर्वहीऐसालगताथाकिमानोकोईपर्वआनेवालाहै।गांवोंमेंचौपाललगतीथी।मतदानकेदिनकहींनहींजातेथे,परिवारकेसदस्योंकेसाथमतदानकेंद्रपरपहुंचतेऔरवोटदेते।आजतोमहंगीगाड़ियोंपरसवारहोकरप्रत्याशीपहुंचतेहैं,कईतरहकावादाकरतेहैंऔरचुनावकेबाददर्शनतकनहींदेते।

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